रियासत कालीन चौकीयां-दरम्याना मुहल्ला-वार्ड नंबर 8
Posted on 02-07-2023 04:05 PM
                                                    दरम्याना मुहल्ला की चौकीयाँ

जब मंडी नगर की नई राजधानी राजा अजबर सेन ने सन् 1527 ई. में बनाई तो यहां पर बाहर से कई व्यापारी व अन्य लोगों को इस शहर में आमंत्रित करके बसाया गया था, ऐसा इतिहास में दर्ज है।

यदि आप ध्यान से पुराने मुहल्लों में स्थित मकानों की रूपरेखा व बनावट देखेंगे तो पाएंगे कि उस समय अकेला मकान किसी भी व्यक्ति/परिवार के पास नहीं था। और लोग अपने अपने निकट समूह (टब्बर) मके साथ दो मंजिला चौकी नुमा घरों में रहते थे।इन सब की बनावट लगभग बराबर होती थी जो आज भी कई पुरानी चौकियों में देखने को मिल जाती है

मंडी नगर के मुहल्लों क्रमशः भगवाहन,दरम्याना, समखेतर व पुरानी मंडी में इन चौकियों का विशेष पैटर्न आपको देखने को मिलेगा क्योंकि नगर वासियों की रिहाईश मुख्यता: इन्हीं मुहल्लों में ही केंद्रित थी। सभी चौकियां अपने साथ वाली चौकी या घर से दरवाजे(दुआरु,ताकि,छोटा दरवाजा )या पतली सी गली से जुड़ी होती थी। क्योंकि उस समय की पारिवारिक व्यवस्था में सुरक्षा और आपसी मेलजोल तथा प्रगाढ़ संबंधों के कारण यह व्यवस्था नगर में विकसित हुई थी। ब्याह शादी या अन्य बड़े उत्सवों में लोगों को धाम खिलाने के लिए भी यह चौकियां बड़े बड़े ओटे-पौड़े होने के कारण आज के बैंक्विट हॉल या जंजघर की शैली पर एक दूसरे के पारिवारिक उत्सवों में बिना किसी अतिरिक्त खर्चे के सहायक होते थे।

समय के साथ साथ इन चौकियों को अपने नाम से एक विशेष पहचान भी मिली। उदाहरण के लिए जिन गांवों से लोग इनमें रहने के लिए आए थे उनसे( दरंगवाड़) या जाति विशेष की कद काठी(लमक्याड़ु)अथवा पेशे या राज दरबार में नौकरी की वजह से (ट्रेज़री या वजीर हाऊस) पर इन चौकीयों के नाम पड़े। और आज तक उन्हीं नाम से यह घर,चौकियां और परौड़ियां नगर में अपने अस्तित्व को बनाए हुए है।

भले ही आज का युवा वर्ग इन सब से अनजान है क्योंकि कई पुरानी चौकियों में परिवारों में पार्टीशन होने पर सभी ने अपने अपने हिस्से में नए भवन निर्मित कर लिए हैं और चौकियों का मूल स्वरूप कई जगह पर लगभग विलुप्त हो चुका है। पहले कुछेक चौकियों के आंगन तो बैडमिंटन कोर्ट जितने बड़े हुआ करते थे।

दरम्याना मुहल्ला:परिचय

आज की युवा पीढ़ी को यह बताना जरूरी है कि मंडी में दरम्याना मुहल्ला कहां पर स्थित था। क्यों इसका यह नाम पड़ा था। जैसा कि नाम से स्पष्ट है जो चीज बीच में होती है उसे मिडल यानी दरम्याना भी कहते हैं।भगवाहन मुहल्ला व समखेतर मुहल्ला के बीच में यह स्थित था इसलिए मध्य में होने के कारण दरम्याना नाम पड़ा होगा।

वर्ष 2020 में मंडी नगर निगम बनाने के लिए अस्तित्व में रहे तेरह मोहल्लों का पुनर्गठन करके इन्हें 15 वार्ड में संगठित कर दिया गया। दरम्याना मुहल्ला जो पहले वार्ड नंबर आठ हुआ करता था उसे आधा भगवाहन मोहल्ला(वार्ड नंबर 12) व आधा समखेतर मुहल्ला(वार्ड नंबर 11) में मिला दिया गया और इस तरह ऐतिहासिक दरम्याना मोहल्ला अब नगर निगम बनने के पश्चात विलुप्त होकर महज इतिहास बनकर रह गया है।

क्योंकि इस पोस्ट में हम रियासत कालीन समय की बात कर रहे हैं तो पहले आपको दरम्याना मुहल्ला की भौगोलिक स्थिति के बारे में बताते हैं की यह कहां पर स्थित था और इसकी रूपरेखा कैसी थी?

यदि आप चौहटा में भूतनाथ मंदिर के पास खड़े हो जाएं तो वहां से आपको भूतनाथ बाजार से होते हुए चिंतपूर्णी मंदिर, बालकरुपी मंदिर के साथ पलाक्खा बाजार से होते हुए वजीर हाउस के नीचे की ओर वेदांत कुटीर तक एक लंबा बाजार दिखाई देता है।

और दूसरी ओर चौहटा में जहां कपड़े की दुकान मैसर्स नंदलाल एंड कंपनी के नाम से है वहां से नीचे की ओर चंद्रलोक रेस्टोरेंट के साथ जाती हुई गली, जिसका नाम अब चंद्रलोक गली पड़ चुका है, वस्तुतः पहले इस नाम से कोई गली नहीं हुआ करती थी। इस गली में जाते हुए आपको आजकल सेपू बड़ी व भले-बाबरू बनाने वालों की दुकान आती है।(यहां से एक गली भूतनाथ बाजार को जोड़ती है जिसे अब प्रेम गली के नाम से भी जाना जाता है और इसमें आजकल मनियारी की होलसेल की कई दुकानें खोलने से यह एक बाजार की शक्ल ले चुका है) मुख्य गली में चलते हुए कुछ दूरी पर चौबाटा में पहुंचते हैं। चौ का अर्थ चार व जहां से चारों और रास्ता जाता है उसे बाटा भी कहते हैं जहां से चार रास्ते जाते हैं उसका नामकरण रियासत काल में पड़ा चौबाटा। मण्डयाली में इसे चबाटा कहकर भी उच्चारित किया जाता है।अभी भी आसपास के घरवाले अपने पते पर चौबाटा बाजार या चबाटा मुहल्ला ही लिखते हैं। यहां से नीचे की ओर बंगला मोहल्ला की ओर जाने के लिए आप चलते हैं तो बांई और प्रसिद्ध बगलामुखी मंदिर आएगा और नीचे बंगला मुहल्ला में आप पहुंचते हैं जिसके नाम का अपना इतिहास है। यहां से एक गली श्मशान घाट की ओर मुड़ जाती है जो आगे जाकर के ब्यासा नदी के किनारे किनारे साहिबानी का देवालय (साहिबणी रा दुआला)जिसे अब एकादश रूद्र महादेव मंदिर के नाम से भी जाना जाता है, के साथ चलते हुए वेदांत कुटीर के पास वजीर हाऊस के साथ उतराई में आती गली के साथ मिल जाती है। इस तरह हम देखते हैं कि दरम्याना मुहल्ला आयताकार की बनावट लिए हुए तीन गलियों के द्वारा 4 ब्लॉक में विभाजित है जिसके चारों ओर पानी की निकासी के लिए नालियां बनी है जो इसकी बाउंड्री बनाकर इसे दूसरे मुहल्ले से अलग करती है।

अब इनमें से आधी से ज्यादा चौकियों के प्रवेश द्वार व बनावट नए निर्माण की वजह से बदल चुकी हैं।केवल संदर्भ के लिए उनके फोटोग्राफ प्रकाशित किए जा रहे हैं।

दरम्याना मुहल्ला की रियासत कालीन चौकियों की संकलित सूची:

जिस नाम से स्थानीय बोली में घर व चौकियां प्रसिद्ध हैं उसी तरीके से ही इन्हें लिखा गया है।

दरम्याना मुहल्ला-वार्ड नंबर 8(नगर निगम बनने से पूर्व)ः


  1. मानगढ़ कोठी (मियां मान सिंघ की कोठी -कैलाश क्लिनिक के आस पास का क्षेत्र-अब नया निर्माण किया जा चुका है। सोशल मीडिया पर यह सबसे पुराना प्रथम फोटो मानगढ़ भवन का देखने को मिलता है जो पीछे कटोच के घर तक फैला हुआ था। अब तो यहां पर सारा नया निर्माण हो चुका है । लेकिन मानगढ़ भवन के कुछ अंश चंद्रलोक गली की तरफ कपड़े की प्रथम दुकान मैसरज नंदलाल एंड कंपनी की ऊपरी मंजिल में अभी भी देखने को मिल जाते हैं। राजा जोगिंदर सिंह का जन्म इसी कोठी में ही हुआ था।                                       

                             

2.मियां की कोठी-इसके बारे में हमें ज्यादा जानकारी नहीं मिल पाई। सेपु बड़ी की प्रसिद्ध दुकान के मालिक से इतना पता चला कि राजा के समय में यह भवन किसी गोहर निवासी कटोच परिवार की महिला का था। अब यह उनके वंशज गुलेरिया के पास है। जहां आपी क्लीनिक बना है व उसके साथ वाला घर कपूर परिवार द्वारा बाद में खरीदा गया था जो कभी इसी भवन का हिस्सा था। मियां की कोठी वाला पुराना प्रवेश द्वार कपूर परिवार के घर को जाता है। मंडी रियासत की इस सबसे पुरानी चौकी का सबसे पुराना प्रवेश द्वार (परौड़)म.न.125/8 अभी भी उसी हालत में मौजूद है।







3.देवीसहाय का घरःयह तीन घर(म.न.90,91,92)मूलत लम्क्याड़ू परिवार के हैं। पहले इसके तीनों आंगन अंदर से जुड़े होते थे। इस के मध्य भाग में अब मल्होत्रा क्लिनिक्स चलता है। मंडी वाले इन घरों को धनदेव मास्टर का घर व प्रसिद्ध साहित्यकार नूतन का घर कहकर भी पहचानते हैं।   

फोटोःहरबंश मल्होत्रा




4..महाशा देवीरूप-चिरंजीलाल मल्होत्राः

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 5.बहल का घर(दरंगवाड़) इस घर में दो आंगन आपस में अंदर से जुड़े होते थे जिन्हें झाक्खड का घर और चेतराम बहल का घर कहकर अभी भी पुकारा जाता है। इस घर के एक कोने में बहल परिवार की दुकान है जिसमें आपको मंडी का प्रसिद्ध पकवान भल्ले बाबरू मिलते हैं जो कि काफी प्रसिद्ध है। 



 6. टंडन का घर: अपने समय के बिजै हाईस्कूल के प्रसिद्ध मास्टर जयवर्धन जी इसी घर में रहते थे।इसलिए आज भी मंडी के लोग इसे 'जैवर्धन मास्टरा रा घर' कहकर पहचानते हैं जो आज की प्रेम गली में स्थित है। यह काफी बड़ी चौकी है।









 7.बिश्ट का घर:यह विशाल चौकी तीन आंगन से अंदर से आपस में जुड़ी होती थी। जिन्हें अभी भी नगरवासी क्रमशः चैंहकू, मधुसूदन व दयोड़ू बिष्ट के घर कहकर पहचानते हैं। इस विशालकाय चौकी के साथ मंडी नगर का इतिहास दर्ज है।

   

  8.कम्याणे का घर:यह दो घर पहले आपस में अंदर से जुड़े होते थे। एक में स्वर्गीय श्री यदुनंदन मल्होत्रा(लक्कड़ साहब-बलदेव) और साथ लगते दूसरे घर में टेकू का घर के नाम से इस घर को आप पहचान सकते हैं।





  9.मल्होत्रा का घर: बैद किरयाने की दुकान इसी चौकी का हिस्सा है जो बालकरूपी मंदिर के विपरीत स्थित है।





                                                                    

10.पुरोहित का घर: मंडी राजा के राजगुरु जगदीश पुरोहित जी के नाम से यह बहुत बड़ा चौकी नुमा घर आज भी आपको चौबाटा से नीचे जाति बार बाईं ओर दिखेगा।                         इसके एक भाग में दीनू पुरोहित व रमा वत्सल के बुजुर्ग रहते थे और यह चौकी अंदर से जुड़ी होती थी। सड़क की ओर आपको एक घर धौणु वकील का नजर आएगा जो काफी बाद में बना था। पुरोहित परिवार ने यह जगह धवन परिवार को बेची थी।




11.भंगाड़िए का घर: राजा के समय यह बहुत बड़ी चौकी 3 आंगनवाली हुआ करती थी जो कि अंदर से जुड़ी होती थी। इसके तीन अलग प्रवेश द्वार थे जो अभी भी मौजूद हैं और जवब जब आप चबाटा से पलाक्खा की ओर जाएं तो जाएं तो प्रथम चौकी आती है जिन्हें आप सोडा वाटर वालों का घर कहकर भी जानते हैं। उसके अगली चौकी दयोड़ु का घर के रूप में पहचान जाएंगे। तीसरा प्रवेश द्वार लखपति के पुराने घर के विपरीत गली में स्थित है।                                                                         

12. पंडित भवानी दत्त शास्त्री का घरःमौका पर अब यह खाली जगह है।पुराना मकान गिर चुका है।

13.जुक्खाए का घर(179/8) मंडी की हिस्ट्री में जुखाए शब्द का संदर्भ मिलघर के पुरखे कभी दरंग में नमक का व्यापार करते थे। 


14. धनी भैंजी/ साधु लाला का घर।



15. बैद का घर(शेखर)


                                                                                    

16.ऊच्ची प्रौढ़: इसके प्रवेश द्वार पर ऊंचाई के कारण सीढ़ियां बनी थी जिस कारण ऊंचाई पर होने से इसका नाम उच्ची परौड़ पड़ा। मंडी वासी इसको 'करतार रा घर' के रूप में ज्यादा जानते हैं। वजीर हाउस के विपरीत यह घर स्थित है। और इसमें जाने के लिए साथ लगती गली से रास्ता जाता है।









                                                        

  17.बड्डी चौक: मण्डीगर में वैद्य परिवार की सबसे बड़ी चौकी है जिसका मुख्य द्वार नीचे बंगले से होकर था लेकिन प्रवेश द्वार की चौखट सड़ कर अब नष्ट हो चुकी है। ऊप के आंगन से भी प्रवेश  द्वार बना है जोकि नया निर्माण शादी बाद में हुआ था जिसे नगर वासी लाली बाबू का घर नाम से भी जानते हैं।     

       




 




18.चमचीड़े री चौक: चौकी के प्रवेश द्वार पर छत में कुछ पक्षी घोंसला बनाकर रहते थे जिन्हें स्थानीय भाषा में चमचीड़े कहते हैं जो कि सारी साल यहां पर रहते थे इस कारण से ही इस चौकी का यह नाम पड़ा।वैसे इसे घटारडु की चौक भी कहते हैं लेकिन उसे इस नाम से कोई नहीं जानता केवल बहुत ही सीनियर सिटीजन आपको यह बता पाएंगे। यह जानकारी हमें श्रीमती लीला हांडा जी से प्राप्त हुई है जिनका यहां मायका है।


19.डुग्घी परौड़: जैसा कि इसके नाम से स्पष्ट होता है इसका प्रवेश द्वार थोड़ा उतराई में था और सीढ़ियां उतरनी पड़ती थी। जिस कारण इसका नाम मंडयाली में डुग्घी परौड़ पड़ा है। यह बहुत ही विशाल चौकी है जिसके दो आंगन है और निचला आंगन बैडमिंटन कोर्ट से भी बड़ा हैं। इस घर को जाने के लिए एक प्रवेश द्वार नीचे वाले रास्ते से भी है।


20. भागीरथ का घर-दरंगवाड़ -बहल।म.न.32/8 बंगला मुहल्ला से खुड़ी की ओर जाने वाले रास्ते में बैद के घर से थोड़ा आगे डुग्गी परौड़ के लिए रास्ता जाता है उसके दाईं ओर यह घर स्थित है। इस घर को कमलपति का घर/ हरीश नेताजी के घर के रूप में भी कई लोग जानते हैं। घर में रहने वाले लोगों की विशेषता यह है कि उन्होंने अपने पूर्वज भागीरथ से लेकर के मौजूदा पीढ़ी तक की सारी वंशावली टांकरी में बनाई थी जिसका हिंदी अनुवाद इन्होंने संभाल कर रखा है।दरंगवाड़ों का इतिहास बटाला घास मण्डी पँजाब से जुड़ा है। मंडी में रहने वाले सभी बहल परिवार अंततः दरंग क्षेत्र से आने के कारण दरंगवाड़ कहलाते हैं। मंडीपीडिया मे जल्दी ही बहल परिवारों के बारे में एक विस्तृत पोस्ट आपको पढ़ने को मिलेगी।


21.बैद का घर:नाड़ी बैद। मंडी में दो प्रकार के वैद्य परिवार रहते चले आ रहे हैं उनमें से इस चौकी के निवासियों को नाड़ी वैद्य कह कर के भी संबोधित किया जाता है।(फोटो डालना है)


22. खुड़ी वालों का घर : इस घर का नाम इसलिए पड़ा है क्योंकि उनके आंगन में एक बहुत ही प्राचीन स्वच्छ पानी का खुड़ी नुमा स्त्रोत था जो शायद अभी भी मौजूद है। इस घर के बुजुर्ग पूर्ण जी पलाक्खा बाजार में दुकान करते थे जिनके नाम के कारण सभी लोग इस घर से परिचित हैं।

23.बाल्ड़ु मुंशी का घर


24. कम्याणे का घर-यह घर हांडा परिवार की चौकी के विपरीत दूसरे कोने में स्थित है उसके साथ ही नीचे की ओर मंडी का प्रसिद्ध मंदिर 'साहिबणी रा दुआला' है। इस घर के निवासी अपना सरनेम मल्होत्रा लिखते हैं पर एक परिवार यहां से अलग घर में खत्री सभा को जाने वाली गली में बस गया था जो अपने सरनेम में कौशल लिखते हैं जो इनका गोत्र भी है।


निष्कर्ष: इस तरह हम देखते हैं कि दरम्याना मुहल्ला में रियासत के समय 24 प्रमुख चौकियां थी। और इनमें रहने वाले समुदाय सेन, कटोच, खतरी व पंडित लोग थे। खतरीयों में क्रमशः मल्होत्रा,बहल,टंडन,कपूर,बिष्ट,वैद्य व गोयल उपनाम वाले परिवार इन चौकियों में अभी भी रह रहे हैं। पंडितों में केवल शर्मा उपनाम वाले ही परिवार रिहाईश करते हैं। मानगढ़ बिल्डिंग (सेन) राज परिवार ने बेच दी थी अब वहां पर मार्केट बन गई है। कटोच परिवार से अब उनके अगले रिश्तेदार गुलेरिया इस मियां की कोठी को देखते हैं जिसमें अब अधिकांश किराएदार रहते हैं।

नीचे दिए गए फ्लोचार्ट से आप भलीभांति दरम्याना मुहल्ला की उपरोक्त चौकियों की भौगोलिक स्थिति भलीभांति समझ सकते हैं।


हम इस सूची को पूर्ण होने का दावा नहीं करते।यदि कोई नाम छूट गया हैं तो आशा है कि आप उस बारे में जानकारी देकर इस पोस्ट को पूरी करने में सहायता करेंगे।

इन चौकी नुमा घरों के निर्माण व इनसे सामाजिक जुड़ाव व लाभ के बारे में अलग से एक विस्तृत पोस्ट निकट भविष्य में आप मंडीपीडिया पर पढ़ेंगे।बस आप जुड़ें रहें। vinodbehl/mandipedia/23


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