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Posted on 15-08-2025 06:54 PM

ओल्ड बॉयज बैंड के सरताज, मंडयाली महोत्सव का आगाज, जिला न्यायवादी विनोद बहल रिटायर्डमेंट के बाद कर रहे लोक संस्कृति की वकालत

सत्य प्रकाश/ मंडी 

सेवानिवृत्त होने के बाद ज्यादातर लोग आराम की जिंदगी चुनते हैं, लेकिन जिला न्यायवादी विनोद बहल ने अपनी जिंदगी के अगले अध्याय को मंडी की लोक संस्कृति की सेवा के नाम कर दिया। कानून की वकालत छोड़कर उन्होंने गीतों, कविताओं, पेंटिंग और शोध के जरिये मंड्याली बोली और पहाड़ी जीवनशैली की वकालत शुरू की। 

वे जहां मंडी के ओल्ड बॉयज बैंड के संस्थाप्क सदस्य हैं, बल्कि मण्ड्याली महोत्सव का आगाज में भी उनकी खास भूमिका रही है। 

घर से शुरू की सांस्कृतिक यात्रा

विनोद बहल ने ‘मेरे अपने’ नामक पारिवारिक समूह बनाकर स्थानीय परिवारों को जोड़ा। उन्होंने इस समूह के सदस्यों से मंड्याली बोली, जीवन शैली, लोक साहित्य, लोक संगीत और स्थानीय इतिहास से जुड़ी जानकारियां एकत्रित जुटाईं और मंचों पर प्रस्तुतियां देने लगे।

विनोद बहल का पेंटिंग और फोटोग्राफी का शौक भी उनकी सांस्कृतिक यात्रा में रंग भरता रहा। साल 2016 में उन्होंने मंड्याली कविताएं लिखली शुरू कीं और इसके साथ ही संगीत सदन मंडी में हरमोनियम, तबला और कैसियो बजाना सीखा।

मंडयाली महोत्सव में कविताओं की खुशबू

वर्ष 2016 में विनोद बहल ने 12 मंडयाली गीत लिखे। उनके लिखे गीतों को संगीत गुरु उमेश भारद्वाज ने संगीतबद्ध किया। उसी वर्ष वे मंडयाली महोत्सव के संस्थापक बने और संगीत सदन मंडी में पहला आयोजन किया। 

विनोद बहल ने लोक साहित्य सृजन की दिशा में गंभीर प्रयास शुरू किए। उन्होंने साहित्य की काव्य विधा को प्राथमिकता दी और उसी उनका पहला कविता संग्रह ‘भाता री घेड़’ प्रकाशित हुआ, जिसने स्थानीय बोली को नई पहचान दी।

ओल्ड बॉयज बैंड का सफर

साल 2017 में विनोद बहल ने ओल्ड बॉयज बैंड की स्थापना की, जिसकी पहली प्रस्तुति अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव 2017 में हुई। सात सालों में अपनी तरह का यह बैंड विभिन्न मंचों पर शानदार 25 मंचीय प्रस्तुतियां दे चुका है। 

साल 2023 में समयाभाव के कारण विनोद बहल इस बैंड के सक्रिय सदस्य नहीं हैं। इस बैंड की पांच गानों की ऑडियो सीडी ‘मंडयाली बीट्स’ रिलीज हुई है, जिसका संगीत उमेश भारद्वाज ने और म्यूजिक अरेंजमेंट एचडी कश्यप ने किया।

अमेरिका से मिला नकद पुरस्कार

 विनोद बहल ने 150 से अधिक मंड्याली कविताएं लिखी हैं और यह क्रम अभी जारी है। उन्हें प्रतिभा पुष्प फाउंडेशन अमेरिका ने 25,000 नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया है। उन्हें रोटरी क्लब मंडी और खत्री सभा ने भी सम्मानित किया है।

विनोद बहल को इंटेक मंडी चैप्टर ने दो बार मंडयाली बोली संरक्षण के लिए सम्मानित है। उन्होंने डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘पोल स्टार हिमाचल’ और शिवरात्रि मेला कमेटी के ‘रिविजीट मंडी’ प्रोजेक्ट में मंडयाली कमेंट्री की, जिसे चार लाख से अधिक लोगों ने पसंद किया।

डिजिटल और साहित्यिक पहल

विनोद बहल यूट्यूब चैनल “भाता री घेड़” पर लगभग 2 लाख व्यूज़ हैं। उन्होंने जून 2023 में अपने दोस्त डॉक्टर पवन वैद्य के साथ मिलकर mandipedia.com पोर्टल शुरू किया, जिसमें स्थानीय संस्कृति पर आधारित 70 से अधिक शोधात्मक लेख अपलोड हैं और 1.5 लाख से अधिक व्यूज़ हैं। 

2024 में उनका दूसरा कविता संग्रह ‘मंदरा मंदरा आस्सा जाणा’ प्रकाशित, जिसका विमोचन सरदार वल्लभभाई पटेल विश्वविद्यालय के कुलपति ने किया। उनका तीसरा कविता संग्रह प्रकाशनाधीन है। 


जनता की अदालत, लोक संस्कृति की वकालत

विनोद बहल का मानना है कि बोली, संस्कृति और इतिहास सिर्फ किताबों में नहीं, बल्कि मंचों और डिजिटल दुनिया में जीवित रहते हैं। लोक संस्कृति को नई पीढ़ी के लिए संरक्षित करना अब उनके जीवन का मिशन बन गया है। 

अपने प्रयासों से लोक संस्कृति, लोक साहित्य के संरक्षण और स्थानीय इतिहास के शोध की नई शुरूआत हुई है। न्यायालय से लेकर सांस्कृतिक मंच तक उन्होंने यह साबित किया है कि सेवा और सृजन का कोई रिटायरमेंट नहीं होता।

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