मानव के 'डिफॉल्ट मोड' का मनोवैज्ञानिक विश्लेषण
कई बार व्यक्ति चाहे कोई भी परिस्थिति हो अपने मूल स्वभाव को ही प्रदर्शित करता है जबकि उस प्रतिक्रिया विशेष की कोई आवश्यकता नहीं होती। विचार आया यह जानने का कि क्या मानव में भी कंप्यूटर की तरह 'डिफॉल्ट मोड' में प्रक्रिया होती है।
गहराई से देखने पर पता चलता है कि मानव स्वभाव में भी एक तरह का “डिफ़ॉल्ट मोड” होता है, लेकिन यह कंप्यूटर के 'बाय डिफ़ॉल्ट' सेटिंग जैसा पूरी तरह स्थिर नहीं होता।
हर व्यक्ति कुछ मूलभूत स्वभाव लेकर जन्म लेता है — जैसे कोई ज़्यादा मिलनसार होता है, कोई अंतर्मुखी, कोई जल्दी गुस्सा करता है, कोई ज़्यादा धैर्यवान।

कंप्यूटर में 'डिफ़ॉल्ट सेटिंग' तब तक नहीं बदलती जब तक हम न बदलें, लेकिन इंसान का 'डिफ़ॉल्ट' स्वभाव जीवन के अनुभवों, परवरिश, शिक्षा, वातावरण और रिश्तों से धीरे-धीरे बदल सकता है।
हमारा स्वभाव अपेक्षाकृत स्थिर होता है, लेकिन मूड क्षणिक होता है और परिस्थिति पर निर्भर करता है।हमारे विचार और प्रतिक्रियाएँ अक्सर तीन मुख्य श्रेणियों में आती हैं — सकारात्मक, नकारात्मक, और तटस्थ।
अलग-अलग लोगों में इनका अनुपात अलग होता है, और यही उनके “डिफ़ॉल्ट नेचर” की झलक देता है।
अगर कंप्यूटर से तुलना करें तो, इंसान में “डिफ़ॉल्ट सेटिंग” + “ऑटो-अडजस्ट मोड” दोनों होते हैं — यानी मूल स्वभाव स्थिर रहता है लेकिन परिस्थितियों के हिसाब से आउटपुट बदलता है।