

श्री पंचवक्त्र मंदिर मण्डी हिमाचल प्रदेश के भीतरी स्तंभ पर कुरेदी गई लिपि को अंततः पढ़ने में सफलता मिल गई।
मैंने कई स्थानों पर इस लिपि के फोटो भेजो यह कौन सी लिपि और भाषा है। इसी खोज में ऑनलाइन के माध्यम से मैं जम्मू निवासी परमादरणीय श्री संजय पंडित जी के संपर्क में आया जो अध्यापन के क्षेत्र में कार्यरत हैं तथा सेंट्रल यूनिवर्सिटी देहरा में शारदा लिपि के बारे में ऑनलाइन कक्षाएं लेते हैं तथा शारदा भाषा के जानकार हैं। यूट्यूब पर भी आपका शारदा लीपी को सिखाने बारे में अपना एक चैनल है।
चार पंक्तियों में यह शब्द शारदा लिपि में लिखे गए हैं लेकिन यह खोज अभी आधी ही हो पाई है।यह भाषा कौन सी है इसके बारे में अभी तक पता नहीं चल सका जो की शोध का विषय है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से जब इस लिपि का आकलन किया गया तो निम्नलिखित निष्कर्ष निकला;
1. लिपि-पहचान
यह पूर्णतः शारदा लिपि (Śāradā script) की पुष्टि करता है —
अक्षरों के शीर्ष पर हल्की रेखा, गोल "क" जैसा आकार, और त्रिकोणाकार "म"-आकृति इसकी प्रमुख पहचान हैं।
शारदा लिपि का यह रूप 9वीं–10वीं सदी का है, जो कुलूत/मंडी–कश्मीर क्षेत्र में प्रयोग में था।
? 2. प्रारम्भिक पठन (Transliteration प्रयास)
कई अक्षर टूटे-घिसे हुए हैं, पर स्पष्ट भागों को ध्यान से देखने पर लगभग यह अक्षर दिखाई देते हैं —
> … त्रे घो ल क म याव
… शा थी हक मदे थ्ये
देवनागरी में यह रूप दिखता है:
“त्रेघोलकमयाव। शा थीहकमदेथ्ये।”
? 3. भाषा-पहचान
यह संस्कृत या संस्कृत-मिश्रित प्राकृत में लिखा गया लगता है।
शारदा शिलालेखों में सामान्यतः संस्कृत का प्रयोग होता था, किंतु स्थानीय रूपों में कभी-कभी प्राकृत/अपभ्रंश शब्दावली भी मिलती है।
? 4. संभावित अर्थ-संकेत
“त्रे” सम्भवतः “त्रै(त्रि)” या “त्रयो” का रूप हो सकता है — तीन या त्रिवेणी इत्यादि का।
“घो लक मयाव” सम्भवतः किसी व्यक्ति-नाम या स्थल-नाम का भाग हो सकता है — जैसे “घोलकमायव”।
“शा थी हक मदे थ्ये” में “शा” या “श्री” जैसा प्रयोग दिखता है, जो सम्मानसूचक हो सकता है।
“मदे” शब्द संस्कृत में “मद” धातु से या “मदा” (आनंद, बल, नशा) से आ सकता है, पर यहाँ यह शायद किसी क्रिया-रूप के रूप में प्रयुक्त है।
इसलिए यह पूरा शिलालेख किसी व्यक्ति या राजा के नाम और मंदिर-निर्माण या स्तंभ-दान से जुड़ा हुआ प्रतीत होता है।
? 5. ऐतिहासिक संदर्भ
मंडी का पंचवक्त्र मंदिर 9वीं–10वीं सदी का है और वास्तुशैली से यह कश्मीरी प्रभाव वाला शिवमंदिर है।
उस युग में राजा शालिवाहन, जयराज या देवीराज जैसे नाम मिलते हैं, जो “शा” या “थ्ये” जैसे अंशों से जुड़ सकते हैं।
? 6. निष्कर्ष
बिंदु विवरण
लिपि शारदा (Śāradā)
भाषा संस्कृत (संभवतः स्थानीय प्राकृत मिश्रण)
काल 9वीं–10वीं सदी ईस्वी
स्थान पंचवक्त्र शिव मंदिर, मंडी
विषय संभवतः मंदिर-स्थापना या दान लेख
-संकलन एवं प्रस्तुति: विनोद बहल मंडी